दोस्त की माँ को चोदकर रंडी बनाया

 
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हैल्लो दोस्तों, में पिछले एक महीने से सेक्सी कहानियों को पढ़ता आ रहा हूँ, मैंने कुछ अच्छी और मजेदार सेक्सी कहानियाँ पढ़ी जिनको पढकर मुझे बड़ा मज़ा आया वो मुझे सभी अच्छी लगी, इसलिए एक दिन मैंने भी सोच कि में भी आप लोगों को अपनी एक सच्ची सेक्स घटना को लिखकर आप तक पहुंचा दूँ.

दोस्तों यह मेरी लाईफ का पहला सेक्स अनुभव है और दोस्तों मेरा नाम जगजीत है. में पंजाब का रहने वाला हूँ और में अभी तक अकेला हूँ. मैंने अब तक शादी नहीं की और मेरी उम्र 22 साल और में दिखने में अच्छा लगता हूँ. दोस्तों यह बात एक साल पहले की है, मेरा एक दोस्त है, जिसकी उम्र करीब 22 साल है और उसका नाम करण है और उसकी माँ जिसका नाम बबली है, वो करीब 42 साल की, लेकिन आज भी वो बहुत हॉट सेक्सी लगती है और इस वजह से वो दिखने में अभी भी 30- 32 साल की लगती है. फिर करीब 5.6 इंच लंबी एकदम पतली उनका वजन करीब 55 किलो और उसका फिगर 36-30-38 है.

दोस्तों जब भी में उनके घर पर जाता था तो में उसको देखकर एकदम मदहोश हो जाता और मेरा मन करता कि में उसको उसी समय पकड़कर उसकी जमकर चुदाई कर दूँ उसका पूरा कामुक बदन मुझे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित करता और में जब भी बिपाशा बसु की कोई भी फिल्म देखता तो मुझे हमेशा अपने दोस्त की माँ का चेहरा ही याद आता और मेरा उनके घर पर बहुत बार आना जाना लगा रहता है और वो मुझसे हमेशा हंसकर बातें किया करती और उनका मेरे लिए बहुत अच्छा व्यहवार था.

एक दिन में आंटी और मेरा दोस्त करण एक साथ एक शादी में गये हुए थे. यह शादी उनके किसी पास के रिश्तेदार में थी, इसलिए उनको वहां पर जाना जरूरी था और उनके कहने पर मुझे भी उनके साथ जाना पड़ा.

रात को आंटी के सर में अचानक से दर्द होने लगा जो धीरे धीरे बढ़ने लगा था और आंटी ने करण को घर छोड़ने के लिए कहा वो उस समय थोड़ा ज्यादा व्यस्त था और उसके साथ साथ में भी, लेकिन तब भी मैंने करण से कहा कि में अब घर जा रहा हूँ, क्योंकि मुझे कल सुबह कहीं बाहर जाना है. फिर आंटी मुझसे कहने लगी कि बेटा जब तुम जा ही रहे हो तो तुम मुझे भी मेरे घर पर छोड़ देना और मेरा घर उनके घर से बहुत दूर था तो इसलिए करण मुझसे बोला कि तुम भी मेरे घर पर ही सो जाना और कल सुबह में तुझे स्टेशन तक छोड़ आऊंगा.

मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है और में अपनी गाड़ी से आंटी के साथ वापस उनके घर पर आ रहा था और वो मेरे पीछे मुझसे थोड़ा चिपककर बैठी हुई थी. आंटी ने उस समय गुलाबी कलर की साड़ी पहनी हुई थी, जिसमे वो बहुत ही सुंदर लग रही थी और उनके बदन से बहुत ही मस्त मनमोहक खुशबू आ रही थी और जब में किसी भी स्पीड ब्रेकर पर अपनी गाड़ी को ब्रेक लगता तो आंटी के बूब्स मेरी कमर पर छू रहे थे, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लंड भी अब धीरे धीरे खड़ा होने लगा था कुछ देर बाद रास्ते में अचानक से बारिश शुरू हो गयी और उसके साथ साथ तेज हवा भी चलने लगी.

मैंने कुछ देर बाद महसूस किया कि अब आंटी ने अपना हाथ मेरी कमर पर रखा हुआ था कि तभी कुछ देर बाद अचानक से मेरी गाड़ी के आगे एक कुत्ता आ गया और उसकी वजह से मैंने एकदम से ब्रेक लगा दिया, तो उसकी वजह से आंटी का हाथ मेरी कमर से फिसलकर मेरी जाँघ पर आ गया और उनका हाथ मेरे खड़े लंड पर छू गया और अब वो मुझसे एकदम चिपककर बैठ गयी, हम लोग करीब 12 बजे घर पहुंच गए और हम दोनों उस समय पूरी तरह से भीग चुके थे उस वजह से मुझे अब आंटी के ब्लाउज के अंदर से उनकी डोरी साफ नज़र आ रही थी.

फिर घर के अंदर पहुंचकर आंटी ने मुझे मेरे दोस्त करण का पजामा पहनने के लिए दे दिया और कहा कि तुम अपने कपड़े बदल लो बहुत भीग गये हो. अब में करण के रूम में अपने कपड़े बदलने चला लगा और आंटी ने टीवी को चालू कर लिया और अब वो टीवी देखने लगी. उस समय मुझे अंदर कमरे में लगे हुए कांच से टीवी साफ नज़र आ रही थी.

उस दिन शनिवार का दिन था और रात को टीवी पर एक्शन फिल्म आती है जब आंटी टीवी चेनल को बदलकर देख रही थी तो सेक्सी फिल्म का चेनल आ गया और आंटी वो फिल्म देखने लगी.

मुझे कमरे के अंदर से सब कुछ साफ नज़र आ रहा था इसलिए में करण की बनियान और उसका पजामा पहनकर कमरे से बाहर आ गया, तो आंटी ने मुझे देखकर एकदम से उस चेनल को बदलकर दूसरा लगा दिया और अब वो भी अपने कपड़े बदलने अंदर पास वाले रूम में चली गयी, तो मैंने जानबूझ कर उसी फिल्म को लगा लिया, क्योंकि वो अंदर रूम में उनके कांच में साफ नज़र आ रही थी और आंटी ने मुझे आवाज़ मारी और कहा कि ज़रा टावल देना में बाहर भूल गयी हूँ.

अब में जैसे ही आंटी को टावल देने अंदर गया तो वो एकदम नंगी खड़ी थी और में उनको उस समय उस हालत में नंगी देखकर घबरा गया और वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी और उन्होंने मेरे हाथ से तुरंत वो टावल अंदर खींच लिया और अब में बाहर आकर बैठ सोफे पर जाकर बैठ गया और दोबारा से टीवी देखने लगा तो मुझे पता ही नहीं चला कि आंटी कुछ देर बाद मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई.

जब उन्होंने मुझसे कहा कि जगजीत क्या तुम कॉफी लोगे तो में उनकी आवाज उनको अपने पीछे देखकर एकदम घबरा सा गया और मैंने टीवी का चेनल बदल दिया और मैंने उनसे कहा कि नहीं आंटी. फिर वो मुझसे कहने लगी कि में कॉफी बनाकर लाती हूँ तब तक तुम टीवी देखो. दोस्तों मुझसे इतना कहकर वो रसोई की तरफ बढ़ चली और आंटी ने उस समय सफेद रंग की पतली सी मेक्सी पहन रखी थी उस मेक्सी में से मुझे सब कुछ साफ नज़र आ रहा था, जिसको देखकर में बड़ा चकित था और कुछ देर बाद आंटी हम दोनों के लिए कॉफी बनाकर ले आई और वो मेरे साथ बैठ गयी.

आंटी ने टीवी का रिमोट लेकर वही चेनल लगा दिया और अब वो फिल्म देखने लगी, लेकिन मैंने अपना सर नीचे झुका लिया और में चुपचाप कॉफी पीने लगा. तभी आंटी मुझसे पूछने लगी क्यों क्या हुआ तुम्हे यह फिल्म नहीं देखनी क्या? अब तुम बहुत शरीफ बन रहे हो, उस समय आगे पीछे से मेरे बदन को ऐसे घूरते हो जैसे अभी मुझे तुम खा जाओगे और अब मेरे सामने शरीफ बनकर अपना रस झुकाकर बैठ गये, चलो अब फिल्म देख लो, मुझसे किस बात की शरम है और अब में उनकी यह बातें सुनकर थोड़ी हिम्मत करके फिल्म देखने लगा.

दोस्तों उसी समय मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया था, जिसकी वजह से मेरा पजामा उस जगह से तंबू की तरह तन गया था. फिर आंटी ने नीचे मेरे खड़े लंड को देखकर धीरे से अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया और में भी थोड़ी सी हिम्मत करके उनके कंधे के ऊपर से घुमाकर अपना एक हाथ आंटी के बूब्स पर ले गया और में उसके बूब्स को सहलाने लगा.

कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि आंटी भी अब मस्त होने लगी थी और वो अब पजामे के ऊपर से मेरे लंड को सहलाने लगी थी. फिर उसी समय मैंने अपने दूसरे हाथ से आंटी की मेक्सी को धीरे धीरे ऊपर उठा दिया और मैंने अपना हाथ उनकी गरम, चिकनी चूत पर रख दिया. फिर तब मैंने अपने हाथ से छूकर महसूस किया कि उन्होंने उस समय पेंटी नहीं पहनी थी और उनकी चूत एकदम साफ थी.

मैंने अपने होंठ आंटी के होंठो पर रख दिए और मैंने अपनी जीभ को आंटी के मुहं में डाल दिया. में उनकी जीभ को चूसने लगा और उस समय हम दोनों बहुत जोश में थे और उसी समय मैंने अपनी ऊँगली को आंटी की चूत में डालकर धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा और में अपने दूसरे हाथ से उनके बूब्स को दबाने, मसलने लगा, जिसकी वजह से आंटी मस्त होने लगी और वो मुझसे कहने लगी आह्ह्ह्हह्ह में कब से तेरे लिए कितनी बेचैन थी ओह्ह्ह्हह्हह् सस्स उउउफफफ्फ़ जगजीत आओ ना.

फिर मैंने तुरंत आंटी का जोश देखकर उनकी मेक्सी को झट से उतार दिया और मैंने उनकी ब्रा को भी उतार दिया. तब में उनके बड़े आकार के एकदम गोरे बूब्स को देखकर पागल हो गया, इसलिए में अब झपटकर उनके बूब्स को अपने दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाने और उनका रस निचोड़ने लगा. फिर आंटी का हाथ मेरे लंड पर पाजामे के ऊपर से बड़ी तेज़ी से घूम रहा था, लेकिन अब उनसे रहा नहीं गया और आंटी ने मेरे पाजामे का नाड़ा खोल दिया और फिर मैंने अपनी अंडरवियर और बनियान को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब हम दोनों एक दूसरे के सामने एकदम नंगे थे.

आंटी मेरे 6 इंच लंबे और 2 इंच मोटे लंड को देखकर बहुत खुश हो गयी और वो मुझसे कहने लगी कि आज कितने दिनों के बाद में इस सुंदर दमदार लंड से अपनी चूत की प्यास को बुझाने जा रही हूँ. में कितने दिनों से अपनी चुदाई के सपने देख रही थी, जो आज पूरा होने वाला है और मैंने इस चुदाई के लिए कितना इंतजार किया है, इसको तुम क्या समझोगे? और मुझसे यह बात कहकर आंटी ने नीचे झुककर तुरंत मेरे लंड को किस किया और फिर वो उसको अपने मुहं में लेकर वो आईसक्रीम की तरह बड़े मज़े लेकर चूसने लगी.

वो शायद उस समय बहुत जोश में थी और अब में अपने एक हाथ से आंटी के बूब्स को दबा रहा था और मेरा दूसरा हाथ उनकी चूत पर था और मैंने अपनी दो उँगलियों को आंटी की प्यासी, तरसती हुई चूत में डाल दिया था, जिसकी वजह से आंटी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी और उनकी चूत ने अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया था. हम दोनों करीब 10-15 मिनट तक यह सब कुछ करते रहे और उसके बाद मैंने आंटी को अपनी गोद में उठाकर उनके बेडरूम तक ले गया और उनको ले जाकर बेड पर लेटा दिया.

फिर मैंने आंटी की कमर के नीचे एक तकिया रख दिया और अब में एक बार फिर से आंटी के ऊपर आ गया और उनके होंठो पर होंठ रखकर में उनके होंठो को चूसने लगा और उसी के साथ साथ में बीच बीच में उनके बूब्स को भी चूसने दबाने लगा था. दोस्तों मेरा लंड आंटी की चूत से जब भी छू जाता तो आंटी एकदम से तिलमिला उठती और वो मुझसे कहने लगती कि अरे अब तो डाल भी दो क्यों मुझे तुम इतना तरसा रहे हो? मुझसे अब और ज्यादा इंतजार नहीं होता, प्लीज अब तुम जल्दी से मेरी चुदाई करके मुझे खुश कर दो.

अब मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया, जिसकी वजह से चूत अब पहले से भी ज्यादा खुल गई और मैंने आगे बढ़कर अपने लंड का टोपा उनकी चूत के खुले मुहं पर रख दिया और फिर ज़ोर से एक धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उनकी चूत में करीब दो इंच अंदर चला गया और आंटी ज़ोर से एकदम चिल्ला गई अरे आह्ह्ह् प्लीज थोड़ा धीरे से करो आईईई मुझे बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन मैंने उनकी कोई भी बात नहीं सुनी क्योंकि में उस समय बहुत जोश में था और मैंने दूसरा धक्का लगा दिया अब मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अंदर जा चुका था, तो आंटी चिल्लाई आईईईइ रे उह्ह्ह्हह्ह में मर गई मादरचोद मैंने तुझे कहा था कि धीरे से डाल, लेकिन तूने मेरी बात नहीं मानी, देख तेरे लंड ने मेरी चूत को फाड़ दिया है और मुझे अपनी चूत के अंदर बहुत दर्द के साथ साथ अजीब सी जलन भी हो रही है.

अब में कुछ देर रुककर अपना लंड अंदर बाहर करने लगा और उस समय मेरे दोनों हाथ आंटी के बूब्स के निप्पल को मसल रहे थे. फिर कुछ देर अब आंटी को मज़ा आने लगा था वो भी नीचे से अपनी कमर को उछाल उछालकर मेरा साथ देने और वो कहने लगी कि हाँ उफफ्फ्फ्फ़ और ज़ोर से आह्ह्ह्ह ज़ोर से चोद मेरी चूत को और ज़ोर से ऊऊह्ह्ह्ह इतना मस्त मज़ा मेरी चूत को कभी नहीं आया, मेरे बूब्स को पूरा दम लगाकर दबा दे, ज़ोर से मसल दे, भींचकर फोड़ दे इन गुब्बारों को, आज तू फाड़ दे मेरी इस चूत को, इसको चोद चोदकर भोसड़ा बना दे ऊन्न्ह्हह्ह हाँ ऐसे ही धक्के मारता जा, यह तेरे लंड को लेने के लिए बहुत प्यासी है और तूने आज अपनी आंटी जी को चोदकर अपनी रंडी बना दिया है, हाँ अब तू लगातार चोद मेरी इस चूत को मादरचोद और चोद चोद और ज़ोर से चोद हरामी के पिल्ले, करता जा रुक मत, बस डालता जा तेरा लंड मेरी चूत में.

अब में उनकी इतनी सारी बातें सुनकर जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था और इतने में आंटी एक बार झड़ चुकी थी और अब में भी झड़ने वाला था, इसलिए मैंने उनसे कहा कि आंटी में झड़ने वाला हूँ क्या में अपना वीर्य बाहर निकाल दूँ? तो आंटी बोली कि नहीं मेरे लाल तू उसको मेरी चूत के अंदर ही डाल दे और मुझे उसमे कोई भी समस्या नहीं है और मैंने एक ज़ोरदार धक्का लगाया और मैंने आंटी की चूत के अंदर ही झड़कर अपना वीर्य चूत में डाल दिया कुछ दो चार धक्के देने के बाद में आंटी के ऊपर ही थककर लेट गया और उस समय में आंटी के होंठो पर अपने होंठ रखकर उनके मुहं को सक करने लगा.

कुछ देर के बाद हम उठे और तब तक 2:45 बज चुके थे. फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और में अपने दोस्त करण के बेडरूम में जाकर सो गया. फिर सुबह जब करण आया तो उसने मुझे उठाया और आंटी ने हमारे लिए चाय बनाई. उस समय मैंने देखा कि आंटी के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी और फिर हमने चाय पी और में नहाकर वहीं पर तैयार हो गया और मैंने करण के पकड़े पहन लिए. फिर उसके बाद करण मुझे स्टेशन पर छोड़कर चला गया और में ट्रेन में बैठकर चला गया.



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One Comment
  1. February 23, 2017 |

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