हाय दैया, हाय दैया !! मर गयी सर! मैं मर गयी गयी सर!! स्टूडेंट बोली जब लंड गया अन्दर

 
loading...

हेल्लो दोस्तों आज मैं एक कहानी tehno-science.ru पे पोस्ट कर रहा हु, उस  दिन प्रज्ञा ने एक मस्त काली टॉप और नीचे पैरों को एक सफ़ेद लेगी पहन रखी थी. प्रज्ञा १२ वीं में पढ़ रही थी. वो मेरी स्टूडेंट थी. पीछले ६ सालो से मैं उसको पढाता आ रहा था. प्रज्ञा मेरे सामने ही जवान हुई हुई. अब वो मेरे जितनी लम्बी हो गयी थी. मेरी ५ फुट ६ इंच की लम्बाई को जब उसने छू लिया तो मेरा लंड अपने आप खड़ा होने लगा. उसकी चंचल आँखे, उसका शर्मा शरमाकर मेरी क्लास में आना. अब सब कुछ मुझे बडा रूमानी लगने लगा. मैं उसके बग्गी रोड स्थित घर उसको पढ़ाने जाता था. प्रज्ञा अब बच्ची नही रह गयी. वो चोदने लायक एक मस्त माल बन गयी थी.

मेरी आँखों में जब वो अपनी हिरनी जैसी चंचल आखें डालकर देखती थी वो मन करता था की इसको यही गिरा के चोद लूँ. ऐसा हुआ भी एक दिन. जब उसने मुझसे मैथ का कोई सवाल पूछा तो मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया.

ये क्या सर? वो भोलेपन से बोली.

कुछ नही, बस ऐसे ही ! मैंने कहा.

ये सिलसिला चल निकला. अब जब भी वो मेरे पास अपनी नोटबुक लेकर आती तो मैं उसके हाथ पर अपना हाथ रख लेता था. अब प्रज्ञा सायद सब कुछ समजने लगी थी. उसका शरीर अब खिल गया था. वो अब एक बच्ची नही रह गयी थी. छाती के उभार अब पूरी तरह से विकसित हो गए थे. बड़ी विशाल पीठ हो गयी थी. प्रज्ञा अब सायद एक स्त्री और पुरुष के बीच जो जिस्मानी रिश्ता होता है, उसे समजने लगी थी. मैं नहीं जानता था की वो अपनी चूत में ऊँगली करती होगी या नही. एक दिन जब मैं उनको पढ़ा रहा था तो मैंने चुपके से उसका इंग्लिश वाली कॉपी उठा ली और उसमे एक चूत और चूत को चोदता लौड़ा बना दिया. ‘प्रज्ञा!! तुम मेरी सबसे अच्छी स्टूडेंट हो, मैंने तुम्हारी चूत में लौड़ा देना चाहता हूँ’ मैंने चित्र बनाकर नीचे लिख दिया. मन में डर था की वो बगावत भी कर सकती थी, अपने मम्मी पापा को भी वो चित्र दिखा सकती है, पर बार बार मेरा दिल करता था की वो ऐसा नही करेगी. पिछले ६ सालों से अपनी इस सबसे खूबसूरत स्टूडेंट को मैं देखता आया था.

‘इसे मैंने इतने दिनों से पढाया है. १ नही २ २ घंटे, ३ ३ घंटे मैंने पढाया है. इसलिए प्रज्ञा को भोगने चोदने खाने का हक मुझे ही है. मैं ऐसा ही हमेशा सोचता था. जब उसके पापा कोई दूसरा टीचर रखने की बात करते थे तो मुझे बड़ी जलन होती थी. इस कलि को मैंने ही फूल बनाया है, इसलिए इसे खाने का पहला हक मेरा ही है. अब मैं और देरी नही कर सकता. जल्द ही मुझे प्रज्ञा जैसी जवान कली का भोग लगा लेना चाहिए. मैंने विचार किया. उस दिन प्रज्ञा बहुत नाराज दिख रही थी. उसने मेरा बनाया वो चित्र देख लिया था. वो उसको लेकर अपसेट दिख रही थी.

ये क्या है सर?? उसने वो चूत और लौडे वाला चित्र मेरे सामने खोल कर रख दिया और पूछने लगी. मैंने उसकी आँखों में नाराजगी पढ़ ली थी.

‘हाँ! ये सच है प्रज्ञा. मैं तुमको चोदना चाहता हूँ! क्यूंकि मैं कोई वासना का पुजारी नही हूँ. पर इसलिए की मैं तुमसे प्यार करता हूँ. अब तुम जवान हो चुकी हो. तुम चुदने को अब तैयार हो चुकी है. अब तुमको पढाई के सिवा ये सब भी सोचना चाहिए. अब चुमको चूत और लौडे के खेल को भी समझना चाहिए. अगर तुमको मेरी ये बातें बुरी लग रही हो तो मुझे साफ साफ कह दो. मैं कल से यहाँ नही आऊंगा. पर अब अगर मैं तुमको देखूंगा तो चोदे बिना नही रह पाउँगा’  मैंने साफ साफ उससे ख दिया.

हो हैरान थी. हो हथप्रथ थी. सायद वो मुझे फूहड़ समझ रही हो. सायद वो मुझे गंवार समझ रही हो. सायद वो मुझे जगली समझ रही हो. उसको पढ़ाने के बाद मैं घर आ गया. मेरे मन में पूरी उम्मीद थी की मैं उसको ६ साल से पढ़ा रहा था. पर ये सब सुनने के बाद वो तुरंत मुझसे हर तरह का नाता खत्म कर लेगी, पर ऐसा नही हुआ. मैं ४ दिन तक उसको पढ़ाने नही गया. मैं इंतजार कर रहा था की गुप्ता जी [प्रज्ञा के पापा] मुझे फोन करेंगे और कहेंगे की अब मुझे आने की कोई जररत नही है. पर ऐसा नही हुआ. मैं इंतजार करता रहा पर उनका कोई फोन नही आया. ५ वें दिन जब मैं प्रज्ञा के घर गया तो उसके पापा बाहर लान में बैठे थे.

अरे मास्टर साहब, कहाँ थे आप इतने दिन? आये क्यूँ नही? प्रज्ञा आपको कितना याद कर रही थी?? वो बोले.

मैं हंस पड़ा और भीतर चला गया. प्रज्ञा को मैं पढ़ाने बैठ गया. उसने वो इंग्लिश वाली कॉपी मेरे सामने लाकर रख दी. मैं थोडा हैरान था. मैं कॉपी उठाई और वो पन्ना खोल्र कर देखा. ‘सर. मेरी चूत मारने का अधिकार आपका ही है. क्यूंकि आपने मुझे पढ़ाने में बहुत मेहनत की है. मैं आपको चूत दूंगी’ प्रज्ञा ने ये बात उस चित्र के नीचे लिख दी थी. मैंने उसका जवाब देखा तो यकीं नही हो रहा था. मैं बार बार उसे पढ़ रहा था, मैंने मैंने नजरे अपनी स्टूडेंट की ओर कर दी. उसने हाँ में सिर हिलाकर सहमती दे दी. मैं उस वक्त सायद दुनिया का सबसे लकी आदमी था. आखिर अब मुझे अपनी मस्त जवान स्टूडेंट को भोगने को मिल जाएगा. उसको चोदने पेलने को मिल जाएगा. मैं खुस और पूरी तरह से संतुष्ट था. अगले दिन जब मैं पढ़ाने गया तो प्रज्ञा के कमरे में चला गया. आज मैं उसको दूसरी नजरों से देख रहा था. रोज की तरह मैं उसको सामान्य नजरों से नहीं देख रहा था. वहीँ उसकी आँखें भी आज मुझसे नही हट रही थी. बहुत कुछ उसकी आँखें कह रही थी. उसकी आँखें में बार बार मैं इजहार और इकरार की पेशकश को पढ़ रहा था. मैं दरवाजा बंद कर लिया और प्रज्ञा गुप्ता की ओर मेरे कदम बढ़ने लगी. वो अपनी जगह टिकी रही. पीछे नही हटी. मैं उसके करीब पहुच गया. वो मेरी ओर देखने लगी. मैंने आगे बढ़ कर वहीँ चीर परिचित बड़ी बड़ी बेहद सुन्दर आँखें चूम ली. हिरनी जैसी वो शरारती आँखें. मैंने अपनी चेली को अपने आलिंगन में भर लिया. वो मेरे लिए कोई ऐरी गैरी लड़की नही थी. सायद मेरे लिए वो सबसे खास लड़की थी. प्रज्ञा मुझसे लिपट गयी. घड़ी दो घड़ी हम एक दूजे में खोये रहें.

उसने अपने हाथ मेरी पीठ पर रख दिए. मुझसे चिपकी रही. कितनी बड़ी बात! जिस चेली को रोज पढाता था आज उसको चुदास और चुदाई का हुनर मैं सिखाऊंगा. कुछ देर तक हम दोनों आलिंगनबद्ध रहें. फिर जादू टूटा. मैंने उसके होठ का रस पीना लाजमी समझा. मैंने अपनी कमर से लिपटे उसके हाथ छुडाये और उसको होंठों को अपने लबों में ले लिया. मैं उसके रसीले कुंवारे होठों को पीने लगा. मेरे जीवन का आज ऐतिहासिक दिन था. मैं नही रुका और अपनी चेली के होठ पीता रहा. वो सहमत थी. वो भी चुदासी थी आज पुरी तरह से. प्रज्ञा की सांसे मेरी साँसों में मिल रही थी. मेरे जिस्म में मेरी रगों का खून तेजी से दौड़ रहा था. ‘आज इसको रगड के चोदना है’ मेरा आवारा दिल बार बार यही आरजू कर रहा था.

हम दोनों गुरु और चेली अपने में खोये रहें. मेरे हाथ प्रज्ञा के स्तन पर चले गए. पिछले कुछ सालों से उसके स्तन बढ़ गए थे. जब वो मेरे सामने बैठकर जरा था झुकती थी तो उसके ताजे ताजे नरम नरम मम्मो के दर्शन हो जाते थे. हम दोनों अपने में खोये रहें. खड़े खड़े मैंने उसके होंठ पीता रहा और उसके टॉप के उपर से उसके स्तन पर हाथ फेरता रहा. फिर हम दोंनो सोफे पर आ गए. वो भली भाति समझ रही थी की आज कौन सा पढ़ पढ़ना है. दिखावे के लिए मैंने उसको कॉपी किताबे खोलकर रखने को कह दिया था. जिससे बाई चांस कोई आ जाए तो कोई दिक्कत ना हो. मैंने उसके नरम नरम होठ पीता रहा और उसके टिकोरे हाथ से पकड़ कर दबाता रहा. मैंने उसके नए नए दूध हाथ से उसके टॉप के गले से उपर निकाल लिए थे. मैं जोर जोर से उसके टिकोरे मसल रहा था. वो मस्त और चुदासी हो रही थी.

मैंने पूरी शरारत दिखाई और जोर जोर से अपने कठोर हाथों से उसके कोमल दूध मसलने लगा. वो और मैं, हमदोनों ही मस्त हो गए. वो दिन यादगार दिन था मेरे लिए. प्रज्ञा गुप्ता जैसी मस्त माल आखिर रोज रोज कहाँ मिलती है. उसके जैसी लड़की लाखों में एक होती है. उसके जैसी लड़की लाखों में एक मिलती है. मैंने उसकी ठोड़ी पकड़ ली, उसके सेक्सी होंठ पीता रहा और उसके मम्मे को निर्ममता से मैं मीन्जता रहा. मैं यकीन से कह सकता हूँ की उसको दर्द तो जरुर हो रहा होगा. मैं पूरे मजे लेकर अपनी चेली को चोदना चाहता था. फिर मैंने उसको उसके ही घर में, उसके ही कमरे में नंगा कर लिया. वो लजा गयी. जिस कमरे में मैं उसको पढाता था वो घर के एक किनारे पर था. वहां कोई आता जाता नही था. वो मेरे सामने बेहया, बेपर्दा हो गयी थी. उसकी आँखों में चुदवाने के ख्वाब मैंने देखे थे. उसकी आँखों में उनकी छिपी हुई चुदवाने की हामी थी.

मैं आज पूरी तरह से अपनी चेली में डूब जाना चाहता था. रोज मैं उसको पढाता था, आज वो मुझे कैसी अच्छे से चोदते पेलते है, वो मुझे सिखाएगी. मैंने फिर से उसकी आखों में देखा और डूब गया. मैंने उसकी आँखों को अपना कलमा समझ के चूम लिया. उसके टॉप को मैं निकाल ही चुका था. मैं प्रज्ञा गुप्ता के आम पीने लगा. वो चुप थी और शांति से अपने गुरूजी को अपने दूध पीला रही थी. मैं मस्ती से कभी कभी उसके निपल्स मैं अपने तेज दांतों से काट लेता था. वो उछल पड़ती थी. मैं मुँह लगाकर उसके मम्मों को पी रहा था. पुरे के पुरे मम्मे मेरे मुँह में अट गए थे. मुझे खुशी हुई की मेरा मुँह इतना बड़ा है की उसके दूध मेरे मुँह में आ गए. बाप रे!! कितने सुकोमल दूध थे उसके. कितने नरम, कितने मीठे., मेरी चुदासी कल्पना से भी परे. ये मेरी चेली है, इसीलिए इसको भोगने का हक मेरा है. मैं इसी फंडे पर काम कर रहा था.

पहला मम्मा जब मैंने पी लिया तो दूसरा मुँह में भर लिया. अब दूसरा पीने लगा. भगवान ने भी औरत जैसी कितनी खूबसूरत चीज बनायी है. अगर लडकियाँ और औरतें ना होती तो हम मर्दों का क्या होता. कैसे हम अपना मनोरंजन करते. मैं प्रज्ञा के मम्मे पीते पीते सोच रहा था. जरुर मेरा उससे कोई रिश्ता था, वरना ना मैं यहाँ आता और ना मुझे उस २० साल की लड़की से प्यार होता. मैंने उसके दोनों रस से लबालब छातियाँ पी ली. फिर मैंने अपनी जींस निकाल दी. लौड़ा मेरा कबसे अपनी चेली की चूत मारना चाहता था. मैंने प्रज्ञा की लैगी निकाल दी. बड़ी छोटी सी चूत थी उसकी. प्रज्ञा जैसी खूबसूरत लड़की की चूत रोज रोज नही मारने को मिलती है. मैंने उसकी पैंटी भी निकाल दी. वो पूर्णतः नग्न हो गयी थी. मैं उसकी छोटी सी चूत पीने लगा. तो तडपने लगी. मैंने जितना सोचा था मेरी चेली उससे जादा निकली.

वो छोटा पटाका नही थी आइटम बम थी. मैंने लपर लपर करके प्रज्ञा की चूत पीता रहा. वो चुदासी हो गयी. मैंने उसके पैर खोल दिए थे. मैंने अंगूठे में ढेर सारा थूक अपने मुँह से लिया और उनकी कुंवारी गांड में डाल दिया.

हाय दैया, हाय दैया !! मर गयी सर! मैं मर गयी गयी सर!!  प्रज्ञा रोने लगी.

श श श !! कुछ नही होगा मैंने कहा. मैंने उसके मुँह पर अपना हाथ रख दिया. जिससे उसकी आवाज बाहर ना जाए. मेरा अंगूठा उसकी कुंवारी गांड फाड़ता हुआ अंदर घुस गया था. मैं उसकी कुंवारी गांड को अपने अंगूठे से चोदने लगा. वो रोने लगी. मैं नही माना और जोर जोर से उसकी नई नई कुवारी गांड को अंगूठे से चोदने लगा. वो अपने हाथ से मेरा हाथ रोकने की नाकाम कोसिस करती रही. मैं उसकी नई नई गांड चोदने लगा. वो बहुत रोई. मैं नही माना. फिर मैंने अपना लौड़ा उसकी गांड में डाल दिया और लेने लगा. थोडा खून उसकी गांड से निकला. कोई ३० मिनट बाद उसका दर्द कम हुआ. मैं उसकी गांड में ही झड गया. मुझे मौज आ गयी.

अब बारी उसकी चूत की थी. बदकिसमती से जब उसकी बुर चोदी तो फिर उसको दर्द हुआ. बहुत खून निकला उसकी चूत से. क्यूंकि प्रज्ञा की बुर और चूत दोनों कुंवारी थी. मैं उसको मजे से पेलपालकर घर आ गया. जानबूझ कर मैंने २ दिन की छुट्टी ले ली जिससे उसको आराम मिल सके. उसके बाद तो मैंने प्रज्ञा गुप्ता को चोदने का शतक पूरा किया और कॉपी में हर बार की चुदाई की तारीक किसी मुक़दमे की तारीक की तरह नोट कर ली. आपको कहानी कैसी लगी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर कमेंट्स बॉक्स में लिखकर बताए.

 

 


loading...

और कहानिया

loading...
One Comment
  1. Savitry
    April 24, 2017 |

Online porn video at mobile phone


chudavai mammy ko pathan dost se antarvasnaRoshni &Shaziya ki chudai bur khanibire bhn cohta bhai xxx storiचैदी चैदा बियफ विडीयै लवडचूत देखकर भाई व फिदा सेक्सीxxxsexyaudiostoryghar me kaam karte mistiri se chudawaya kahani hindixxx.khhani.hindi.mesavita bhabhi ki kahani hindiभाई बहन सेखस कहानीकुत्ते के सात सेक्स्क्सक्स विडियो हिंदी स्टोरीHindi animal sex chudai kahanistory hindi xxfree desi hindi sexनचनिया चुदाईsaxy suhagraat marathi kahanee hideantarvasna hot story in hindiALAG ALAG THARA SIXCY KHINEAxxx badi choat sex videoanjli bhabhi jeetu ki jabrdast chudai storyबुर का रसkamuta dot come xxx handikamukta..comhindi me xxx saxi khanitai ky sath chudai ki khaniyablackmail kar gand chodi sex storyबहन को सोते हुए बोबे दबाएऔडिये सेकसिgao ki vidwa ki cudai kute se dekhi xstoriesचुदकड परिवारsadisuda bahen ko codamosi ki fari cutGaon ki badbudar chudai ki kahaniमाय भाभी सेक्स स्टोरीChitra ki sexy gaand mein lauda Hindi Desi Kahaniyamere gao me meri didi awara ladko se chud gai hindi sex storymaa beta sex xxx kahaniमाँ को काला लँड चुसते देखापोर्न विडियो माँ और बेटा का घटनासेक्सकाहनी बेटे के सामनेmosi xxx kahani hindibhai bahan x storiDidi Gand didi ki shadi me maa ne papa se marwaya full story inभाई ने बहन की चुदाई की बाग मेshadisuda.vidhva.kamsin kuari.noukrani.sex storyHot HD sexy Didi ke trean me chodai ke kahanianti.bur.kahaniDidi or didi ke sas ke chudai ek sathgirl teacher aur student boy ke sexy hindi kapganiyaमा की चोडी चुतxxx hindi khaney.comxxx kahanianjane me bhai se chudwa liya sexy storiyaantarvasna.com sir ne dulhan bana seal todyदीदी तूम्हारा बूर दीख रहा हैmulani ki sex kahani Hindikamkuta.comHINDISEXSTORIजोगxxx kahaninew hindi sex kamukta setori19Shal bahan ne 12 shal bhai chudawaya xxx storiलडकि सेक्स कहानियां फोटो के सातचाचा ने मालिश कर गाण्ड मारीhot kahani ke sath picxnxxCoot land kahni bap n bati cohdi xxx sexमाँ बेटा चुदाईपेंटी बरा नयतिमाँ बेटा पति सेकसि कहानीxxnx am full hd jaberjastihindi sexy garam kahani me bhabhi bahuभाई ओर बहन एेक कमरे मे शोयेथे ओर बहन रतको उठी ओर देखा तो भाई का सात इस का लड तो बहन भाई सेही सेक्स करवाया वीडियो डाउन लोड तो